नीरवता

शनिवार, जून 19, 2004

कुछ हर्फ...

'नीरवता' जैसे विरोधाभासी शीर्षक को पढकर विस्मित होना स्वाभाविक है...दर असल, 'शब्द' का उद्‌गम तो 'नीरवता' ही माना गया है, और नीरवता की महिमा का बखान क्या करूँ, कईमशहूर शायरों ने इसके बारे में कुछ कहने का प्रयास मात्र किया है, जैसे -

मुँह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाज़ारों में, खामोशी पहचाने कौन

और,

जिस तरफ जाईये, है खोखले लफ्ज़ों का हुजुम
कौन समझे यहाँ आवाज़ की गहराई को

माना शब्द 'ब्रह्म' है, मगर उस ब्रह्म को पाने के लिए भी निःशब्द की ही सहायता लेनी पडती है। शब्द में बहुत शक्ति है लेकिन नीरवता में उससे भी अधिक है। कहते है 'मुनि' शब्द का उद्‌गम भी 'मौन' से ही हुआ है, लेकिन यहाँ मौन का अर्थ 'शाब्दिक मौन' से भी कहीं गहरा है।

2 Comments:

  • वैसे आप हिन्दी चिट्ठा जगत में ज़रा भी नीरवता नहीं पायेंगे। स्वागत है!

    By Blogger Debashish, at 21 जून 2004 को 12:07 pm  

  • धन्यवाद देबाशीष ! हिन्दी चिट्‌ठा जगत से परिचय कराने के लिए, और अनायास ही एक निद्रामग्न लेखक को जगाने के लिए...

    By Blogger Nirav, at 21 जून 2004 को 1:47 pm  

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