हाय...ये बेवफाई
सुना है, आजकल जिन सॉफ्टवेअर संस्थाओं से कर्मचारी का बडी संख्या में पलायन हो रहा है, वहाँ के नियोक्ता ग़ालिब का एक शेर पढते है -
दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है
हमको उनसे वफा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है

1 Comments:
कस्में वादे, प्यार वफ़ा सब बाते हैं, बातों का क्या?
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आलोक, at 25 जून, 2004 10:28 अपराह्न
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